छत्तीसगढ़

बिलासपुर सड़क संग्राम: 7.49 करोड़ मंजूर, फिर भी बदहाल, मनिकपुर-धूमा के सैकड़ों ग्रामीणों नेशनल हाईवे 200 पर बदहाल सड़क के खिलाफ किया विरोध, दो घंटे तक जाम रही फोर लेन..

बिलासपुर जिले में सड़कों की बदहाली अब प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आम जनता के आक्रोश का प्रतीक बन चुकी है। बिलासपुर नेशनल हाईवे 200 पर स्थित मनिकपुर और धुमा गाँव के सैकड़ों ग्रामीणों ने जर्जर सड़क के कारण हो रही भारी परेशानियों और दुर्घटनाओं के विरोध में दर्रीघाट फोर लेन पर बड़ा चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का यह सख्त कदम प्रशासन के बार-बार के आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने का सीधा परिणाम है।

​आक्रोश की मुख्य वजह: गड्ढे और 7.49 करोड़ की अनदेखी

​बिलासपुर के मस्तूरी और बिल्हा जनपद क्षेत्र में PWD की अधिकांश सड़कों की हालत बेहद खराब है, लेकिन मानिकपुर से धूमा तक 7 किलोमीटर की सड़क की बदहाली विशेष रूप से चिंताजनक है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क में इतने गहरे गड्ढे हो चुके हैं कि वाहन लगातार खराब हो रहे हैं और दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं।

​ग्रामीणों का सबसे बड़ा रोष इस बात को लेकर है कि इस 7 किलोमीटर की सड़क के निर्माण के लिए शासन द्वारा 7 करोड़ 49 लाख रुपए पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सरकारी खजाने से पैसा स्वीकृत होने के बावजूद सड़क का न बनना, प्रशासन और संबंधित विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​दो घंटे तक जाम रही फोर लेन

​जनप्रतिनिधियों सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने जर्जर सड़क निर्माण की मांग को लेकर दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तक दर्रीघाट फोर लेन पर बैठकर नारेबाजी करते हुए चक्का जाम किया।

​गुस्साए ग्रामीणों के इस प्रदर्शन ने सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगा दी। हालांकि, ग्रामीणों ने अपनी मानवता दिखाते हुए केवल एंबुलेंस को आने-जाने की अनुमति दी, बाकी सभी वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप रहा।

​अधिकारियों का आश्वासन और ग्रामीणों की अंतिम चेतावनी

​चक्का जाम की सूचना मिलते ही, मौके पर बिलासपुर तहसीलदार प्रकाश साहू और पीडब्ल्यूडी विभाग के एसडीओ आदित्य गोरवर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और सड़क का निरीक्षण करने के बाद उन्हें समझाया।

​पीडब्ल्यूडी एसडीओ ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि आज दिनांक से ही रोड पर गिट्टी, बजरी आदि डालकर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

​अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने अपनी अंतिम चेतावनी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, “यदि दिसंबर माह तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जाता है, तो हम उग्र प्रदर्शन करेंगे और उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस चेतावनी के बाद ही, ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त किया। नोट सभी जानकारी ग्रामीणों के बताये अनुसार..

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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