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छत्तीसगढ़ में मानसून फेल! 67% कम बारिश से सूखे जैसे हालात, IMD ने घोषित किया ‘Large Deficient’ क्या कहता है मौसम विभाग? कब आगे बढ़ेगा मानसून?

छत्तीसगढ़ में जून का तीसरा हफ्ता बीतने को है, लेकिन मानसून की रफ्तार बेहद सुस्त पड़ी हुई है। प्रदेश में बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 21 जून के बीच राज्य में सामान्य से 67 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी वजह से मौसम विभाग ने पूरे छत्तीसगढ़ को ‘लार्ज डेफिसिएंट’ (Large Deficient) यानी अत्यधिक कम बारिश वाली श्रेणी में डाल दिया है।

​कम बारिश और भीषण उमस के कारण प्रदेश के कई जिलों में खेती-किसानी पर गहरा संकट मंडराने लगा है। वहीं, बिलासपुर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसने जून के महीने में लोगों को झुलसा दिया है।

​जिलों का हाल: मोहला-मानपुर में 95% कम बारिश, बिलासपुर-रायपुर बेहाल

​मौसम विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बहुत नीचे है। कुछ जिलों में स्थिति इतनी चिंताजनक है कि वहां सामान्य से 80 से 95 प्रतिशत तक कम पानी बरसा है।

  • मोहला-मानपुर-चौकी: प्रदेश में सबसे खराब स्थिति इस जिले की है, जहां अब तक केवल 4.5 मिमी बारिश हुई है (95% की कमी)।
  • राजनांदगांव: यहां सामान्य से 91 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
  • बिलासपुर: न्यायधानी में 88 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे जलस्तर और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
  • रायपुर: राजधानी में अब तक महज 25.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि यहां का सामान्य औसत 81.1 मिमी है।

​इसके अलावा सक्ती, बीजापुर, बालोद, बलौदाबाजार, महासमुंद और रायगढ़ जैसे प्रमुख जिलों में भी मानसून पूरी तरह कमजोर बना हुआ है।

​बिलासपुर में पारा 41.8 डिग्री पार, रायपुर में सामान्य से 7°C अधिक गर्मी

​बारिश नहीं होने और बादलों की बेरुखी की वजह से मध्य छत्तीसगढ़ में गर्मी और उमस ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शनिवार को बिलासपुर प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

​राजधानी रायपुर में भी पारा 40.9 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन के सामान्य तापमान से 7.2 डिग्री ज्यादा है। वहीं रायपुर के माना एयरपोर्ट पर तापमान 41.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक मध्य छत्तीसगढ़ में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री अधिक रहेगा और कुछ इलाकों में लू (Heat Wave) चलने की भी आशंका है।

​किसानों की बढ़ी चिंता, खरीफ फसलों की बोनी अटकी

​मानसून की इस धीमी चाल ने छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। ग्रामीण इलाकों में कृषि कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर है:

  1. बोनी प्रभावित: पानी के अभाव में किसान अभी तक धान की बोनी शुरू नहीं कर पाए हैं।
  2. नमी गायब: जून के शुरुआती दिनों में हुई हल्की बौछारों के बाद जिन किसानों ने खेत तैयार किए थे, अब तेज धूप के कारण उन खेतों की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
  3. जलसंकट: गांवों के छोटे तालाब, नहरें और जलाशय खाली पड़े हैं, जिससे सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन भी नहीं बच रहा है।

​कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर अगले एक सप्ताह के भीतर प्रदेश में भारी और अच्छी बारिश नहीं होती है, तो इस साल खरीफ सीजन की फसलों का रकबा (Area) बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

​क्या कहता है मौसम विभाग? कब आगे बढ़ेगा मानसून?

​राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बदलाव के संकेत दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 23 जून के आसपास मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं।

​अगले 5 दिनों के लिए विभाग ने अनुमान जताया है कि प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही कुछ जगहों पर आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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