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मौसम अपडेट: बिलासपुर पहुंचा मानूसन, फिर भी नहीं बरसे बादल; गर्मी और उमस की वजह से लोग हुए बेहाल…

छत्तीसगढ़ मौसम अपडेट: छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून के बिलासपुर पहुंचने की आधिकारिक घोषणा तो हो चुकी है, लेकिन न्यायधानी सहित आस-पास के इलाकों में वर्षा का इंतजार अब भी बना हुआ है। मानसून की एंट्री के बाद भी बुधवार को शहर भीषण उमस और चिलचिलाती धूप की गिरफ्त में रहा। लगातार बढ़ती नमी और तेज धूप के कारण बिलासपुर फिलहाल प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों व राहगीरों को झेलनी पड़ी।

​बिलासपुर में पारा 39 डिग्री के पार, विरोधाभासी रहा मौसम

​बुधवार को बिलासपुर का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक यानी 39.0°C दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.6°C रहा। हालांकि मंगलवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, लेकिन हवा में बढ़ी हुई नमी (उमस) के कारण लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिली।

​मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एक ओर मानसून के आगमन की घोषणा हुई और दूसरी ओर वर्षा की एक भी प्रभावी बौछार नहीं पड़ी, जिससे मौसम का मिजाज पूरी तरह विरोधाभासी नजर आया।

​💠 मानसून पहुंचने का मतलब तुरंत भारी वर्षा नहीं: एक्सपर्ट

​मौसम विशेषज्ञ अब्दुल सिराज खान के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों तक आगे बढ़ चुका है। मानसून की उत्तरी सीमा इस समय सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंच गई है। अगले 2 से 3 दिनों के भीतर प्रदेश के शेष क्षेत्रों में भी इसके आगे बढ़ने की पूरी संभावना है।

एक्सपर्ट कमेंट: अक्सर लोग मान लेते हैं कि मानसून घोषित होते ही तेज वर्षा शुरू हो जाएगी, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। मानसून का वास्तविक अर्थ समुद्र से नमी लेकर आने वाली हवाओं का उस क्षेत्र तक पहुंचना है। प्रभावी वर्षा के लिए बादल निर्माण, कम दबाव का क्षेत्र और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों का अनुकूल होना आवश्यक होता है।

​💠 इन मौसमी प्रणालियों से बदलेगा मिजाज; अंधड़ और वज्रपात की चेतावनी

​मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस समय कई सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं:

  • ​राजस्थान से लेकर गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक मध्य समुद्र तल पर सीजनल द्रोणिका (Trough) बनी हुई है।
  • ​उत्तर बंगाल की खाड़ी और तटीय बांग्लादेश के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊंचाई पर एक चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय है।
  • ​दक्षिण-पूर्व मध्यप्रदेश के ऊपर भी एक चक्रवाती घेरा बना हुआ है।

​इन प्रणालियों के प्रभाव से 25 जून को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। विभाग ने एक-दो स्थानों पर तेज अंधड़ चलने और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी भी जारी की है।

​💠 गर्मी और उमस से बढ़ रहा डिहाइड्रेशन का खतरा

​तेज उमस और ऊंचे तापमान का सीधा असर आम जनजीवन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। पसीना अधिक निकलने के बावजूद हवा में भारी नमी के कारण वह जल्दी नहीं सूखता, जिससे शरीर में लगातार थकावट बनी रहती है। डॉक्टरों ने इस मौसम में डिहाइड्रेशन और हीट एग्जॉशन से बचने के लिए पर्याप्त पानी, ओआरएस (ORS) घोल और हल्के भोजन का सेवन करने की सलाह दी है।

​💠 किसानों में जगी अच्छी उम्मीद

​भले ही बिलासपुर शहर को अभी अच्छी बारिश का इंतजार हो, लेकिन प्रदेश में सक्रिय हुए इन सिस्टमों ने खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ने से धान की बुवाई तेजी पकड़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जलाशयों और भूजल स्तर को बड़ा लाभ मिलेगा।

​📊 छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों का तापमान (बुधवार का रिकॉर्ड)

शहर

अधिकतम तापमान (°C)

न्यूनतम तापमान (°C)

बिलासपुर

39.0

25.6

माना (रायपुर)

37.0

25.5

पेंड्रारोड

36.2

26.0

अंबिकापुर

33.5

25.0

जगदलपुर

32.9

23.2

 

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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