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मानसून : 2 से 8 जुलाई तक झमाझम बारिश! प्रदेश में मानसून होगा पूरी तरह एक्टिव, बिलासपुर लगातार चौथे दिन सबसे गर्म, उमस ने बढ़ाई परेशानी..

CG Weather Flash: छत्तीसगढ़ में नौतपा जैसी स्थिति जून के आखिरी हफ्ते में देखने को मिल रही है। शुक्रवार को दोपहर बाद अचानक घिरे काले बादलों और शहर के कई हिस्सों में हुई झमाझम बारिश ने बिलासपुर को कुछ पलों के लिए राहत की उम्मीद तो दी, लेकिन यह राहत चंद मिनटों में ही आफत में बदल गई। बारिश की बूंदें जमीन पर गिरते ही थम गईं और उसके बाद शुरू हुआ उमस का ऐसा दौर जिसने लोगों को पसीने-पसीने कर दिया।

​आलम यह है कि बिलासपुर 39.1 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ लगातार चौथे दिन भी पूरे छत्तीसगढ़ का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि असली झमाझम बारिश का दौर 2 से 8 जुलाई  के बीच शुरू होगा, जिसके बाद ही इस चुभती गर्मी से मुकम्मल आजादी मिलेगी।

तापमान का तांडव: सामान्य से 6 डिग्री ऊपर पहुंचा पारा

​शुक्रवार की सुबह से ही बिलासपुर की सड़कों पर अंगारे बरस रहे थे। तेज धूप और गर्म थपेड़ों (लू जैसी स्थिति) ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा था। दोपहर बाद मौसम ने करवट ली, बादल छाए और कुछ इलाकों में तेज तो कुछ में हल्की बौछारें पड़ीं। लेकिन इस मानसूनी हलचल ने राहत देने के बजाय हवा में नमी (Humidity) का स्तर इतना बढ़ा दिया कि लोग उमस से बेहाल हो गए।

  • बिलासपुर का रिकॉर्ड: यहां अधिकतम तापमान 39.1°C रहा, जो सामान्य से 6 डिग्री ज्यादा है। वहीं, रात का न्यूनतम तापमान भी 28.4°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है।
  • पेंड्रा रोड रहा सबसे ठंडा: एक तरफ जहां बिलासपुर तप रहा था, वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 23.8°C रिकॉर्ड किया गया, जो कल प्रदेश में सबसे कम रहा।

वैज्ञानिक विश्लेषण: आखिर बारिश के बाद क्यों तड़पा रही है गर्मी?

​आम जनता के मन में यह सवाल है कि जब बादल बरस रहे हैं, तो ठंडक क्यों नहीं हो रही? मौसम विशेषज्ञ अब्दुल सिराज खान और अन्य वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की तकनीकी वजह साफ की है:

“जब जमीन महीनों से तप रही होती है, तो केवल छिटपुट या हल्की वर्षा होना काफी नहीं होता। हल्की बारिश से जमीन की गर्मी शांत नहीं होती, बल्कि वह भाप बनकर ऊपर उठती है। जब तक लगातार, मूसलाधार और व्यापक (Wide-spread) वर्षा नहीं होती, तब तक वातावरण में जमा ‘थर्मल हीट’ खत्म नहीं होती। यही वजह है कि बिलासपुर में बारिश के बाद गर्मी और अधिक महसूस होने लगी।”

2 से 8 जुलाई: प्रदेश में दिखेगा मानसून का असली रौद्र रूप

​मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंच चुकी है। छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों में मानसून को आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

​मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 2 से 8 जुलाई के बीच छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी रफ्तार पकड़ने वाला है। इस दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली ठंडी हवाओं का तगड़ा मिलन होगा, जिससे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक झमाझम बारिश दर्ज की जाएगी। देश के कुछ हिस्सों में यह सक्रिय दौर 13 जुलाई तक खिंच सकता है, जिसके बाद मानसून थोड़ा धीमा पड़ेगा।

4 बड़े मौसमी सिस्टम एक साथ एक्टिव, अगले 7 दिन ‘हाई अलर्ट’

​इस समय छत्तीसगढ़ के ऊपर एक साथ चार-चार मौसमी प्रणालियां काम कर रही हैं, जो भारी बारिश का आधार तैयार कर रही हैं:

  1. सीजनल द्रोणिका (Trough): राजस्थान से लेकर ओडिशा तक, उत्तर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रास्ते एक ट्रफ लाइन गुजर रही है।
  2. चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation): बंगाल की खाड़ी, म्यांमार और उत्तरी तेलंगाना के ऊपर ऊपरी हवा का एक मजबूत चक्रवात बना हुआ है।
  3. दो अन्य द्रोणिकाएं: इन चक्रवातों को सपोर्ट करने के लिए दो अलग-अलग विंड शीयर ज़ोन और द्रोणिकाएं भी सक्रिय हैं।

चेतावनी: इन सिस्टम्स के असर से आज यानी 27 जून से प्रदेश में आकाशीय बिजली (वज्रपात), अंधड़ (तेज हवाएं) और गरज-चमक की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश का यलो/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

राजधानी रायपुर समेत अन्य जिलों का हाल

  • रायपुर: राजधानी में भी बादलों का डेरा है। आज आसमान मुख्य रूप से मेघमय रहेगा। गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और अंधड़ चलने की संभावना है। रायपुर का अधिकतम तापमान 37°C और न्यूनतम 25°C के आसपास रहने का अनुमान है।
  • बीते 24 घंटे की बारिश के आंकड़े: प्रदेश के सन्ना में सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश हुई। इसके अलावा शंकरगढ़, दाढ़ी, जनकपुर भरतपुर और पिपरिया में 2-2 सेमी, तथा कवर्धा व लालपुर थाना क्षेत्र में 1 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

​आने वाले 48 घंटों में इन आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे मानसूनी बारिश की रफ्तार को देखते हुए ही खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी करें।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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