राजधानी दिल्ली की सियासत में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने पार्टी से बगावत कर दी। राघव चड्ढा ने घोषणा की है कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसद (दो-तिहाई बहुमत) एक साथ मिलकर भाजपा में विलय (Merge) कर रहे हैं।
संविधान के प्रावधानों का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि उन्होंने भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है। कानून के मुताबिक, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ पाला बदलते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।
उन्होंने बताया कि इस विलय से संबंधित हस्ताक्षरित दस्तावेज राज्यसभा के माननीय सभापति को सौंप दिए गए हैं।
कौन-कौन से सांसद हुए शामिल?
सूत्रों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के अनुसार, भाजपा का दामन थामने वाले सांसदों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
- राघव चड्ढा
- संदीप पाठक (AAP के संगठन महासचिव)
- अशोक मित्तल (LPU के चांसलर)
- हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
- स्वाति मालीवाल
- विक्रमजीत सिंह साहनी
- राजिंदर गुप्ता
बगावत की मुख्य वजहें
इस ऐतिहासिक टूट के पीछे पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान को जिम्मेदार माना जा रहा है:
- पद से हटाना: हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी थी, जिससे चड्ढा नाराज चल रहे थे।
- पार्टी की कार्यशैली पर सवाल: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने अपनी जवानी के 15 साल जिस पार्टी को दिए, वह अब अपने सिद्धांतों से भटक गई है। मुझे महसूस हो रहा था कि मैं एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूँ।”
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: पार्टी ने उन पर ‘सॉफ्ट पीआर’ करने और सदन में सरकार के खिलाफ मजबूती से आवाज न उठाने के आरोप लगाए थे।
AAP और BJP की प्रतिक्रिया
- AAP का आरोप: आम आदमी पार्टी की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी नेताओं ने इसे भाजपा की ‘साजिश’ करार दिया है और आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियों (ED/CBI) का डर दिखाकर उनके सांसदों को तोड़ा गया है।
- BJP का रुख: भाजपा ने इस कदम का स्वागत किया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राघव चड्ढा को केंद्र सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी या मंत्रालय सौंपा जा सकता है।
क्या होगा असर?
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों (संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और संत बलबीर सिंह) तक रह गई है। यह अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।




















