रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, प्रशासनिक सुधार और ढांचागत परियोजनाओं को गति देने के लिए कई दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकारी विभागों में जमा कबाड़ (स्क्रैप) के पारदर्शी निस्तारण से लेकर सड़क निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों को विशेष राहत देने के प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है।
कैबिनेट बैठक में लिए गए 3 सबसे प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:
1. सरकारी विभागों का कबाड़ बेचेगा MSTC, 3 साल के लिए बढ़ा अनुबंध
राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्रियों के पारदर्शी एवं व्यवस्थित निस्तारण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिपरिषद ने भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि को आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।
- पारदर्शिता और बेहतर राजस्व: यह अनुबंध नवंबर 2019 से प्रभावी है और 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। MSTC के अत्याधुनिक ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर स्क्रैप सामग्री खरीद सकेंगे। इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि राज्य सरकार को कबाड़ का बेहतर मूल्य (राजस्व) भी प्राप्त होगा।
- समय और संसाधनों की बचत: इस फैसले के बाद अब सरकारी विभागों को अलग-अलग निविदा (टेंडर) और विज्ञापन जारी करने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रशासनिक समय और संसाधनों की बड़ी बचत होगी, साथ ही कार्यालय परिसरों में स्वच्छता और बेहतर स्पेस मैनेजमेंट हो सकेगा।
2. सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधीन काम करेगा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल
प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
गौरतलब है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम, 2026” लागू होने के बाद पूर्व के छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) का विलय नए कर्मचारी चयन मंडल में हो चुका है। व्यापम की सभी परिसंपत्तियां और देनदारियां भी अब इस नए मंडल में शामिल हो गई हैं।
3. सड़कों के निर्माण में नहीं आएगी रुकावट, डामर की बढ़ती कीमतों के बीच ठेकेदारों को राहत
वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में उछाल के कारण 01 अप्रैल 2026 के बाद बिटुमिन (डामर) की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई थी। इससे राज्य में सड़क निर्माण और रखरखाव (संधारण) के कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने जनहित में एक बड़ा संवेदनशील फैसला लिया है।
- सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत: सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का निर्णय लिया है।
- निर्धारित फार्मूले से मिलेगी क्षतिपूर्ति: यह राहत केवल बिटुमिन के मूल्यों में हुई असाधारण वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए एक तय फार्मूले के आधार पर दी जाएगी। निर्माण के अन्य घटकों पर अनुबंध में पहले से तय एस्केलेशन (मूल्य वृद्धि) के नियम ही लागू रहेंगे।
- केंद्र की तर्ज पर फैसला: भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए इसी तरह की राहत के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश में विकास की गति बाधित न हो और जनता को समय पर चमचमाती सड़कों की सौगात मिल सके।




















