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भारत में इस साल सूखे का अनुमान! टूट सकता है 150 साल का रिकॉर्ड, क्या होता है ‘सुपर एल-नीनो’ और यह क्यों है इतना खतरनाक?

Super El-Nino Alert in India: देश के अधिकांश हिस्सों में सूरज आग उगल रहा है और पारा 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत पूरा उत्तर और मध्य भारत इस समय भीषण लू (Heatwave) की चपेट में है। लेकिन आने वाले दिनों में यह मुसीबत और बढ़ने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक विनाशकारी ‘सुपर एल-नीनो’ (Super El-Nino) आकार ले रहा है, जो भारत समेत पूरी दुनिया में मौसम का चक्र बिगाड़ कर रख देगा।

​वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सुपर एल-नीनो 1877 के बाद की सबसे भयानक मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है। इसका सीधा असर भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ेगा, जिससे देश में सूखे और बाढ़ दोनों का खतरनाक संकट मंडरा रहा है।

​⚠️ देश में तेजी से बढ़ रहा पारा, बांदा में 47 डिग्री के पार

​फिलहाल देश के कई राज्य भीषण गर्मी से तप रहे हैं। बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया, जबकि अहमदाबाद और नागपुर में तापमान 41 से 43 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र भी भयंकर तपिश झेल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

​🛑 क्या होता है ‘सुपर एल-नीनो’ और यह क्यों है इतना खतरनाक?

एल-नीनो (El-Nino) एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके कारण वैश्विक हवाओं का पैटर्न बदल जाता है और दुनिया भर का मौसम प्रभावित होता है।

क्यों टूटेगा 150 साल का रिकॉर्ड?

जब समुद्र की सतह के तापमान का 3 महीने का औसत सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तो उसे ‘सुपर एल-नीनो’ कहते हैं। लेकिन इस बार वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो यह 1877 में दर्ज किए गए अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (2.7°C) को पार कर जाएगा और 150 साल का रिकॉर्ड टूट जाएगा।

 

​अमेरिकी एजेंसी NOAA के मुताबिक, मई से जुलाई 2026 के बीच एल-नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है, जो दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक खिंच सकता है।

​🌾 भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था पर सीधा संकट

​भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून से देश की कुल 70 प्रतिशत बारिश होती है। एल-नीनो के मजबूत होने से मानसून कमजोर पड़ेगा। IMD के अनुसार, इस सीजन में देश में केवल 800 मिमी के आसपास बारिश होने की संभावना है।

​इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के उन 60 प्रतिशत किसानों को होगा, जो खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का, सोयाबीन) के लिए पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं। कम बारिश से पैदावार घटेगी, जिससे देश में महंगाई और खाद्यान्न संकट का खतरा बढ़ सकता है।

​🗺️ भारत में कहां सूखा पड़ेगा और कहां आएगी बाढ़?

​मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सुपर एल-नीनो का असर पूरे भारत में एक जैसा नहीं होगा:

  • सूखे की मार: भारत के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों (जैसे यूपी, एमपी, राजस्थान, महाराष्ट्र) में मानसून बेहद कमजोर रहेगा, जिससे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
  • बाढ़ की तबाही: दूसरी ओर, एल-नीनो के प्रभाव से चेन्नई और दक्षिण भारत के कुछ तटीय इलाकों में सामान्य से बहुत ज्यादा और बेमौसम भारी बारिश होगी, जिससे भयंकर बाढ़ का खतरा है।

​💸 लग सकता है अरबों डॉलर का आर्थिक फटका

​इतिहास गवाह है कि जब-जब एल-नीनो मजबूत हुआ है, दुनिया को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। 1982-83 के एल-नीनो से दुनिया को $4.1 ट्रिलियन और 1997-98 के “सदी के एल-नीनो” से करीब $5.7 ट्रिलियन का नुकसान हुआ था। इस बार का सुपर एल-नीनो वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंचा सकता है।

​🏢 क्यों बन रहे हैं शहर ‘कंक्रीट के तपते द्वीप’?

​मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस जानलेवा गर्मी के लिए सिर्फ वैश्विक कारक ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारण भी जिम्मेदार हैं:

  1. साफ आसमान: लंबे समय से सूखा मौसम होने और बादलों की कमी के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती पर आ रही हैं।
  2. अर्बन हीट आइलैंड: शहरों में कंक्रीट की इमारतें, घनी आबादी, वाहनों का धुआं और AC से निकलने वाली गर्म हवाओं के कारण शहर “तपते हुए कंक्रीट के द्वीप” बन चुके हैं, जहां का तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में कई गुना ज्यादा है।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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