भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून 2026 को लेकर अपना ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई तक केरल तट पर पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने इसमें 4 दिन की मॉडल त्रुटि (± 4 दिन) की संभावना जताई है।
वर्तमान स्थितियों को देखते हुए अगले 24 घंटों के भीतर मानसून के दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।
अगले 7 दिनों का क्षेत्रीय पूर्वानुमान
देश के विभिन्न हिस्सों में अगले एक सप्ताह के दौरान मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। एक तरफ भारी बारिश का दौर शुरू होगा, तो दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम भारत भीषण गर्मी की चपेट में रहेगा।
1. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत: ‘भीषण लू’ की चेतावनी
मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है।
- राजस्थान: 15-21 मई के दौरान पश्चिमी राजस्थान में लू चलेगी, जबकि 18 मई के बाद स्थिति और गंभीर होकर ‘भीषण लू’ में बदल सकती है।
- यूपी, पंजाब और हरियाणा: उत्तर प्रदेश में 16 मई से और पंजाब-हरियाणा में 17 मई से लू का असर दिखेगा। दिल्ली में भी तापमान में 2-4°C की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
- मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़: इन राज्यों में 18 से 21 मई के बीच गर्म हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।
2. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत: भारी बारिश का अलर्ट
मानसून की आहट के साथ ही दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
- केरल और कर्नाटक: केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अगले 3-4 दिनों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
- पूर्वोत्तर: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 21 मई तक रुक-रुक कर भारी बारिश जारी रहेगी। 15 मई को दक्षिणी असम में अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है।
3. पूर्वी भारत: आंधी-तूफान और ओलावृष्टि
- बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 15 से 21 मई के बीच गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
- ओडिशा और अंडमान द्वीप समूह में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
किसानों के लिए विशेष सलाह
मौसम विभाग ने कृषि कार्यों से जुड़े लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उत्तर भारत के किसान जहां लू से बचाव के उपाय करें, वहीं दक्षिण और पूर्वोत्तर के किसानों को भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए अपनी फसलों का प्रबंधन करने का सुझाव दिया गया है।
मुख्य मौसमी प्रणालियाँ (Synoptic Systems):
वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश और पाकिस्तान के पास चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय हैं। साथ ही, एक ट्रफ रेखा मध्य प्रदेश से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई है, जो आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करेगी।




















