रायपुर/भुवनेश्वर: बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन अब गहरे डिप्रेशन (Deep Depression) में तब्दील होकर पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह मौसमी सिस्टम 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार करेगा। इसके प्रभाव से तटीय इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे अंदरूनी राज्यों में अगले 3 से 4 दिनों तक अत्यधिक भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।
राज्यवार अलर्ट और स्थिति:
छत्तीसगढ़ : तट पार करने के बाद यह सिस्टम अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ेगा। इसके असर से छत्तीसगढ़ में 23 सितंबर को ‘बहुत भारी’ और 24 सितंबर को ‘अत्यधिक भारी’ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य में 25 और 26 सितंबर को भी तेज बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। प्रशासन को निचले क्षेत्रों में जलभराव और नदी-नालों में संभावित बाढ़ की स्थिति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा (सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र): राज्य के दक्षिणी जिलों (कोरापुट, गजपति, गंजाम, मलकानगिरी) में अत्यधिक भारी बारिश के चलते रेड अलर्ट लागू है। खुर्दा, गंजाम, जगतसिंहपुर, गजपति और मलकानगिरी में एहतियातन स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया है। चिल्का झील में नौका सेवाएं रोक दी गई हैं।
आंध्र प्रदेश: उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और यनाम क्षेत्र में 20 से 30 नॉट (40-60 किमी/घंटा) की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल रही हैं। विशाखापत्तनम, भीमुनिपट्टनम, गंगावरम और कलिंगपट्टनम बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत (Local Cautionary Signals) जारी कर दिए गए हैं और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
तेलंगाना: तटीय सीमा से सटे तेलंगाना में 23 और 24 सितंबर को ‘अत्यधिक भारी बारिश’ और 30-50 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। 25 व 26 सितंबर को भी राज्य के कई हिस्सों में मुसलाधार बारिश का अलर्ट है।
‘अर्नब’ चक्रवात नाम पर आईएमडी का रुख:
आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में यह सिस्टम ‘गहरे डिप्रेशन’ के रूप में ही तट पार करेगा। जब तक यह औपचारिक रूप से चक्रवाती तूफान का रूप नहीं ले लेता, इसे तकनीकी तौर पर ‘चक्रवात अर्नब’ नहीं कहा जाएगा। यदि यह आगे जाकर चक्रवात की श्रेणी में पहुंचता है, तभी उत्तर हिंद महासागर सूची के तहत इसे ‘अर्नब’ नाम दिया जाएगा।




















