छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हुए बहुचर्चित और भीषण झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए (NIA) की विशेष अदालत, जगदलपुर ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने भाकपा (माओवादी) के सभी 10 दोषी कैडरों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है।
इन्हें मिली फांसी की सजा
अदालत द्वारा सजा पाए गए 10 दोषियों की सूची इस प्रकार है:
- प्रमिला मोडियम
- चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
- सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
- मुक्का मांडवी
- कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
- आयता मरकाम
- मडकामी देवा
- जोगा मडकामी
- बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
- महादेव नाग
5 सितंबर को ठहराया गया था दोषी
इससे पहले, 5 सितंबर 2026 को अदालत ने इन 10 आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता (IPC), हथियार अधिनियम (Arms Act) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था और सजा की अवधि पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अंतिम फैसला सुनाते हुए मृत्युदंड का ऐलान किया।
25 मई 2013 का वो भयावह दिन
यह मामला 25 मई 2013 का है, जब प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के सशस्त्र कैडरों ने बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र में झीरम घाटी (NH-221) से गुजर रहे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर एक सोची-समझी साजिश के तहत भीषण हमला किया था।
माओवादियों द्वारा किए गए आईईडी (IED) धमाके, अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड हमलों में 24 निर्दोष नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 35 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में इलाज के दौरान 3 और घायलों ने दम तोड़ दिया था। हमले के बाद नक्सलियों ने मृतकों और घायलों से हथियार, गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी लूट लिए थे।
101 गवाहों की गवाही और एनआईए की जांच
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच के बाद कुल 39 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी:
पहला आरोप पत्र (9 आरोपी): 25 सितंबर 2014
पूरक आरोप पत्र (30 आरोपी): 28 सितंबर 2015
इनमें से 10 आरोपियों के खिलाफ शुरुआती मुकदमा चलाया गया, जिसमें अभियोजन पक्ष के 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान 1 आरोपी की न्यायिक हिरासत में मृत्यु हो गई थी।
कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाबलों की हत्या की थी साजिश
एनआईए की जांच में यह साबित हुआ कि प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के सशस्त्र कैडरों ने अपनी स्थानीय समितियों/डिविजनों के साथ मिलकर अपने टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) के तहत परिवर्तन यात्रा के काफिले में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की हत्या करने की आपराधिक साजिश रची थी।




















