नई दिल्ली/रायपुर: देश में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। इसी बीच मौसम विभाग (IMD) ने साल 2026 के मानसून को लेकर अपना पहला पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जो खेती-किसानी और आम जनता के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मानसून की बारिश ‘सामान्य’ से कम रहने की संभावना है।
92% ही होगी बारिश: सामान्य से 8% की कमी
मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान होने वाली औसत बारिश (Long Period Average – LPA) इस बार 92 फीसदी रहने का अनुमान है। अगर पिछले आंकड़ों (1971-2020) पर गौर करें, तो देश की औसत बारिश 87 सेमी मानी जाती है, लेकिन इस बार इसमें 8% तक की कमी दर्ज की जा सकती है।
किन राज्यों पर मंडरा रहा है सूखे का साया?
आईएमडी के नक्शे और वितरण चार्ट के अनुसार, इस बार बादल पूरे देश पर मेहरबान नहीं होंगे। विशेषकर मध्य और उत्तर भारत में संकट गहरा सकता है:
- उत्तर भारत: पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में औसत से कम बारिश होने की संभावना है।
- मध्य भारत: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून कमजोर रहेगा। विदर्भ और गुजरात में भी सामान्य से नीचे बारिश का अनुमान है।
इन इलाकों में होगी ‘झमाझम’ बारिश
कमजोर मानसून के बीच कुछ राज्यों के लिए अच्छी खबर भी है:
- पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
- दक्षिण भारत: केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मानसून की स्थिति सामान्य बनी रहेगी।
क्यों रूठ रहे हैं बादल? क्या है अल-नीनो का खेल?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बारिश कम होने के पीछे प्रशांत महासागर में पैदा हो रही ‘अल-नीनो’ (El Nino) की स्थितियां हैं। ‘ला नीना’ की स्थिति अब तटस्थ हो रही है, जिससे मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, हिंद महासागर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बनने की उम्मीद है, जो मानसून को पूरी तरह फेल होने से बचा सकता है।
मई के अंत में आएगा दूसरा अपडेट
यह मौसम विभाग का प्रारंभिक अनुमान है। विभाग मई 2026 के आखिरी हफ्ते में दूसरा विस्तृत और अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा, जिससे हर क्षेत्र की बारिश की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।




















