कोरबा/ जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसुनवाई की सजीव तस्वीर उस वक्त देखने को मिली, जब कलेक्टर कुणाल दुदावत ने एक आम महिला के इशारे को महज़ संकेत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की पुकार समझा।
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानने के लिए कलेक्टर लगातार दौरे कर रहे हैं। ग्राम करतला में ग्रामीणों की बैठक लेकर उनकी समस्याएं सुनने के बाद वे आगे के निरीक्षण के लिए निकल चुके थे।
इसी दौरान, गांव से बाहर निकलते समय सड़क पर एक स्कूटी सवार महिला ने गुजरती हुई कलेक्टर की गाड़ी को पहचानते ही हाथ उठाकर रुकने का संकेत दिया। आमतौर पर ऐसे दृश्य नजरअंदाज हो जाते हैं, लेकिन यहां संवेदनशीलता ने औपचारिकता पर जीत हासिल की। कलेक्टर ने तुरंत अपनी कार रुकवाई और महिला के पास आने का इंतजार किया।
महिला ने बताया कि वह समय पर बैठक में नहीं पहुँच सकी, इसलिए अपनी समस्या नहीं रख पाई। कलेक्टर ने सहजता और आत्मीयता के साथ कहा
कोई बात नहीं… आपकी बात सुनना ही हमारी जिम्मेदारी है, बताइए क्या समस्या है।
महिला ने जमीन से जुड़ी अपनी परेशानी बताई। कलेक्टर ने बिना देर किए मौके पर ही राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और समाधान सुनिश्चित करने को कहा।




















