छत्तीसगढ़मौसम समाचार

छत्तीसगढ़ मौसम अलर्ट: बंगाल की खाड़ी में बना नया सिस्टम, अगले 3 दिन मूसलाधार बारिश का अलर्ट..

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से मानसून की बेरुखी झेल रहे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। प्रदेश में सुस्त पड़े मानसून को रफ्तार देने के लिए बंगाल की खाड़ी में एक मजबूत सिस्टम एक्टिव हो गया है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मूसलाधार बारिश के आसार जताए हैं। प्रशासन ने कई संभागों में भारी से अति भारी वर्षा को लेकर चेतावनी (Weather Alert) भी जारी कर दी है।
​48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी, रायपुर में रिकॉर्ड 15 सेमी पानी गिरा
​बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय सिस्टम के सक्रिय होने से मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बस्तर और बिलासपुर संभाग में मानसून जमकर बरस रहा है। इस बदले मौसम का असर राजधानी रायपुर में साफ देखने को मिल रहा है, जहां बीते महज 12 घंटों के भीतर 15 सेंटीमीटर (150 मिमी) बारिश दर्ज की जा चुकी है। झमाझम बारिश के चलते प्रदेश भर में तापमान में भारी गिरावट आई है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है।
​खेती-किसानी के लिए ‘संजीवनी’: प्रदेश में इस साल अब तक मानसूनी बारिश सामान्य से 46 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी। इसके कारण खरीफ फसलों की बोआई और रोपा (धान की रोपाई) का काम बेहद धीमी गति से चल रहा था और किसान परेशान थे। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह बारिश फसलों के लिए अमृत साबित होगी और कृषि कार्यों में तेजी आएगी।
​बचेली में सबसे ज्यादा 140 मिमी बारिश, चांपा और ओरछा भी भीगे
​पिछले 24 घंटों में प्रदेश के बस्तर और बिलासपुर संभाग में मानसून ने जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई है। दंतेवाड़ा जिले के बड़े बचेली में सर्वाधिक 140 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी भारी बारिश हुई है:
​ओरछा और चांपा: 70 – 70 मिलीमीटर
​कोंटा, कुटरू और भैरमगढ़: 60 – 60 मिलीमीटर
​मौसम वैज्ञानिकों ने बताया- आखिर क्यों अचानक एक्टिव हुआ मानसून?
​मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान में दो बड़े मौसमी सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं:
​स्पष्ट निम्न दबाव (Low Pressure Area): उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट के ऊपर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसका चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) समुद्र तल से 9.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है, जो भारी नमी खींच रहा है।
​मजबूत मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough): मानसूनी द्रोणिका इस समय दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से शुरू होकर मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ और उत्तर ओडिशा से होते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। इसकी वजह से छत्तीसगढ़ के आसमान पर बादलों का भारी जमावड़ा है।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
error: Content is protected !!