छत्तीसगढ़

चक्रवात ‘मुरासु’ का अलर्ट: दक्षिण छत्तीसगढ़ पर सबसे ज्यादा असर, जानें आपके जिले में कैसा रहेगा मौसम..

रायपुर / जगदलपुर: बंगाल की खाड़ी में बने भीषण चक्रवाती तूफान “मुरासु” का लैंडफॉल (तट से टकराने की प्रक्रिया) आज रात से शुरू होने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, मुरासु 2 नवंबर की आधी रात (23:30 बजे IST) से 3 नवंबर 2026 की तड़के (04:00 बजे IST) के बीच नेल्लोर और नरसापुर (ओंगोल के पास, दक्षिण आंध्र प्रदेश तट) से टकराएगा। इस दौरान 100 से 110 किमी/घंटे (झोंकों में 120 किमी/घंटा) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

​चक्रवात का सीधा लैंडफॉल भले ही आंध्र प्रदेश में हो रहा है, लेकिन इसके विशाल नमी वाले घेरे (Cloud Mass) के कारण छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों (बस्तर संभाग) में चक्रवात मुरासु का भारी से अत्यंत भारी प्रभाव देखने को मिलेगा।

​छत्तीसगढ़ का जिला-वार मौसम अलर्ट और प्रभाव (2 से 4 नवंबर)

​मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के लिए 2, 3 और 4 नवंबर के लिए चेतावनी और अलर्ट जारी किया है:

​1. ऑरेंज अलर्ट क्षेत्र (अत्यंत भारी प्रभाव – बस्तर संभाग)

​आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा से सटे इन जिलों में 2 से 4 नवंबर के दौरान मूसलाधार बारिश और 40-50 किमी/घंटे की गति से तेज हवाएं चलने का अनुमान है:

​सुकमा: चक्रवात का पहला और सबसे ज्यादा असर सुकमा जिले में दिखेगा। 3 व 4 नवंबर को अत्यंत भारी बारिश की संभावना है।

​बीजापुर: आंध्र तट के नजदीकी असर से कई क्षेत्रों में जलभराव और भारी बारिश की चेतावनी।

​दंतेवाड़ा: नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट।

​बस्तर (जगदलपुर): तेज झोंकेदार हवाओं के साथ भारी बारिश होगी।

​नारायणपुर: हल्की से मध्यम बारिश के बाद 3 नवंबर से भारी बारिश का सिलसिला तेज होगा।

​2. येलो अलर्ट क्षेत्र (मध्यम से भारी प्रभाव – दक्षिण-मध्य छत्तीसगढ़)

​इन जिलों में बादल छाए रहेंगे, गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर भारी वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना है:

​कोराबा और कांकेर (उत्तर बस्तर): मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी।

​कोंडागांव: तेज बारिश और गरज-चमक का अलर्ट।

​धमतरी और गरियाबंद: ओडिशा सीमा के प्रभाव से 3 और 4 नवंबर को भारी बारिश की संभावना।

​राजनांदगांव, बालोद, मानपुर-मोहला: तेज हवाओं के साथ मध्यम वर्षा होगी।

​3. आंशिक प्रभाव क्षेत्र (मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़)

​रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सरगुजा, कोरिया और जशपुर:

इन जिलों में चक्रवात का असर मुख्य रूप से बादलों की आवाजाही, हल्की से मध्यम बारिश और तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के रूप में दिखेगा। यहां भारी तबाही जैसी स्थिति की आशंका कम है, लेकिन 3 और 4 नवंबर को तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

​किसानों की चिंता बढ़ी: धान की फसल को नुकसान की आशंका

​छत्तीसगढ़ में इस समय धान कटाई और तैयार फसल की संभाल का सीजन चल रहा है। मौसम विभाग की इस चेतावनी ने बस्तर और मैदानी इलाकों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है:

​जलभराव: कटी हुई धान की फसलें खेतों में पानी भरने से सड़ सकती हैं।

​फसल गिरना: 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं खड़ी धान की फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

​सुरक्षा सलाह और सावधानियां

​किसानों के लिए: कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों या शेड के नीचे ढककर रखें। मंडियों में रखे अनाज को तिरपाल से ढकें।

​निचले इलाकों के निवासी: बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में निचले इलाकों में रहने वाले लोग जलभराव से सतर्क रहें।

​यात्रा से बचें: 2 से 4 नवंबर के बीच बस्तर संभाग के घाटी क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज बारिश के समय यात्रा करने से बचें।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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