रायपुर | राजधानी के आजाद चौक थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को नाकाम करते हुए अपहरण किए गए दो युवकों को सकुशल मुक्त करा लिया है। ₹2 लाख के लेनदेन के विवाद में आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से दोनों युवकों का अपहरण किया था और हथियार के दम पर उनसे जमीन के कागजात पर दस्तखत करा लिए थे।
मुखबिर की सूचना पर त्वरित एक्शन
घटना 19 फरवरी 2026 की है। डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल को मुखबिर से सूचना मिली कि घोराही तालाब (रामकुंड) क्षेत्र की एक झोपड़ी में दो व्यक्तियों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी राहुल देव शर्मा और एसीपी इशु अग्रवाल के नेतृत्व में आजाद चौक पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर तत्काल इलाके की घेराबंदी की गई।
झोपड़ी में रेड और बंधकों की रिहाई
पुलिस टीम ने रणनीतिक तरीके से सघन तलाशी अभियान चलाया और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर एक झोपड़ी में छापा मारा। वहां से धमतरी निवासी जीवन यदु और राकेश शर्मा को सुरक्षित छुड़ाया गया।
पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे:
- अपहरण का स्थान: आरोपियों ने दोनों पीड़ितों को करबला तालाब के पास से अगवा किया था।
- वजह: ₹2 लाख के लेनदेन का पुराना विवाद।
- लूटपाट: बंधक बनाकर उनसे मारपीट की गई, मोबाइल, मोटरसाइकिल और नकद राशि लूटी गई। साथ ही डरा-धमकार जमीन के दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए।
हिस्ट्रीशीटर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और लगातार दबिश देकर 6 आरोपियों को धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपियों का विवरण निम्नानुसार है:
- कामरान अब्बास (29 वर्ष) – पूर्व अपराधी (जुआ एक्ट)।
- नवीन उर्फ नन्नू ढीमर (19 वर्ष)।
- लक्की निषाद उर्फ छोटा चिकन (19 वर्ष) – पूर्व रिकॉर्ड (हत्या का प्रयास)।
- राकेश धीवर (24 वर्ष)।
- अनिल धीवर (30 वर्ष)।
- हरिओम सोनकर (47 वर्ष) – मुख्य आरोपी, जिसके विरुद्ध अपहरण, आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी के 14 पूर्व मामले दर्ज हैं।
जब्ती: पुलिस ने इनके पास से 02 पिस्टल, 02 जिंदा कारतूस, 06 मोबाइल फोन और ₹3,500 नकद बरामद किए हैं।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (308(5), 296, 351(3), 127(8), 115(2), 117(2), 61, 140(1), 310(2), 111) और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस टीम की सराहना: इस सफल ऑपरेशन में थाना प्रभारी अजीत सिंह राजपूत, उपनिरीक्षक लेखन सिंह वर्मा और उनकी टीम (आरक्षक दीपक, गुलशन, विनोद, मुकेश व सचित) की विशेष भूमिका रही।




















