भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति ने आगामी राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए विभिन्न राज्यों से अपने उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। आज नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय से जारी इस सूची में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है।
प्रमुख राज्यों के उम्मीदवारों की सूची
पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए गए हैं:
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क्र. |
राज्य |
उम्मीदवार का नाम |
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1 |
बिहार |
श्री नितिन नवीन |
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2 |
बिहार |
श्री शिवेश कुमार |
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3 |
असम |
श्री तेराराश गोवाला |
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4 |
असम |
श्री जोगेन मोहन |
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5 |
छत्तीसगढ़ |
श्रीमती लक्ष्मी वर्मा |
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6 |
हरियाणा |
श्री संजय भाटिया |
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7 |
ओडिशा |
श्री मनमोहन सामल |
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8 |
ओडिशा |
श्री सुजीत कुमार |
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9 |
पश्चिम बंगाल |
श्री राहुल सिन्हा |
भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए छत्तीसगढ़ से एक चौंकाने वाला लेकिन रणनीतिक नाम आगे बढ़ाया है— लक्ष्मी वर्मा। जैसे ही भाजपा मुख्यालय से उनके नाम की घोषणा हुई, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर कौन हैं लक्ष्मी वर्मा और पार्टी ने उन पर इतना बड़ा दांव क्यों खेला है?
कौन हैं लक्ष्मी वर्मा?
लक्ष्मी वर्मा छत्तीसगढ़ भाजपा की एक बेहद अनुभवी और जमीन से जुड़ी महिला नेता हैं। वे वर्तमान में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। लक्ष्मी वर्मा को संगठन में एक ‘साइलेंट वर्कर’ माना जाता है, जो प्रचार से दूर रहकर पार्टी की मजबूती के लिए काम करने में विश्वास रखती हैं।
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: वे लंबे समय से भाजपा से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने जिला पंचायत सदस्य से लेकर प्रदेश स्तर के पदों तक का सफर तय किया है।
- संगठन में भूमिका: वे छत्तीसगढ़ में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल में महिला कार्यकर्ताओं का नेटवर्क काफी मजबूत हुआ था।
- सामाजिक जुड़ाव: वे विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और ओबीसी (OBC) समाज के बीच गहरी पैठ रखती हैं, जो छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है।
लक्ष्मी वर्मा ही क्यों? (पार्टी की रणनीति)
भाजपा द्वारा लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजने के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- महिला सशक्तिकरण का संदेश: ‘मातारी वंदन योजना’ जैसी योजनाओं के बाद भाजपा अब नेतृत्व में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहती है। लक्ष्मी वर्मा को टिकट देकर पार्टी ने महिला वोटर्स को एक बड़ा संदेश दिया है।
- जमीनी कार्यकर्ता को सम्मान: दिल्ली की राजनीति में अक्सर बड़े चेहरों को जगह मिलती है, लेकिन लक्ष्मी वर्मा जैसे समर्पित कार्यकर्ता को चुनकर भाजपा ने यह साबित किया है कि संगठन के प्रति वफादारी का इनाम जरूर मिलता है।
- जातीय समीकरण: लक्ष्मी वर्मा ओबीसी वर्ग से आती हैं। राज्य की राजनीति में ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ाना भाजपा की भविष्य की चुनावी रणनीति (2028 विधानसभा) का हिस्सा है।
कैसा रहा है उनका कार्य करने का तरीका?
लक्ष्मी वर्मा के बारे में उनके करीबी कार्यकर्ता बताते हैं कि वे “बात कम और काम ज्यादा” करने वाली नेता हैं। वे छत्तीसगढ़ के सुदूर बस्तर से लेकर सरगुजा तक के महिला समूहों से जुड़ी रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं के स्वरोजगार के मुद्दों पर वे अक्सर मुखर रहती हैं।
“लक्ष्मी जी ने हमेशा संगठन को सर्वोपरि रखा है। उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणा है जो बिना किसी पद की लालसा के दिन-रात काम करते हैं।”
— भाजपा प्रदेश पदाधिकारी
आगे क्या?
छत्तीसगढ़ में विधानसभा के संख्या बल को देखते हुए लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय है। राज्यसभा में वे छत्तीसगढ़ की महिलाओं और ग्रामीण समस्याओं की आवाज बनेंगी।




















