खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत से पहले राज्य सरकार ने किसानों के लिए खाद (उर्वरक) वितरण को लेकर नए और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि सभी किसानों को समय पर खाद मिले, सोसायटियों में लंबी लाइनें न लगानी पड़ें और खाद की कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
आइए जानते हैं कि इस बार आपको सहकारी समिति (सोसायटी) से खाद किस नियम के तहत मिलेगी:
1. यूरिया और DAP का नया कोटा (पिछले साल के अनुसार)
इस साल आपको कितनी खाद मिलेगी, यह इस बात पर तय होगा कि आपने पिछले साल (खरीफ 2025) में कितनी खाद उठाई थी:
- यूरिया का नियम: पिछले साल आपको जितनी यूरिया मिली थी, उसकी 80% (80 प्रतिशत) मात्रा ही इस बार आपको असली बोरी के रूप में मिलेगी। बची हुई 20% मात्रा अगर सोसायटी में उपलब्ध होगी तो दी जाएगी, नहीं तो उसके बदले आपको नैनो यूरिया (तरल/लिक्विड) दिया जाएगा।
- DAP का नियम: पिछले साल मिली DAP का केवल 60% (60 प्रतिशत) ही इस बार पारंपरिक बोरी में मिलेगा। बाकी बची 40% मात्रा के लिए आपको NPK खाद या नैनो DAP का विकल्प दिया जाएगा।
- ध्यान दें: सरकार ने साफ कहा है कि किसी भी किसान को नैनो यूरिया या नैनो DAP लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यह पूरी तरह आपकी मर्जी पर निर्भर है।
2. जमीन के हिसाब से किश्तों में मिलेगी यूरिया
सोसायटी में एक साथ भीड़ और यूरिया की कमी को रोकने के लिए सरकार ने जमीन के रकबे (एकड़) के हिसाब से किश्तें तय कर दी हैं:
- छोटे किसान (2.5 एकड़ तक जमीन): इन्हें इनकी पूरी यूरिया एक बार में (एकमुश्त) मिल जाएगी। इन्हें बार-बार सोसायटी चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।
- मझोले किसान (2.5 से 5 एकड़ तक जमीन): इन्हें यूरिया दो किश्तों में मिलेगी। दूसरी किश्त, पहली किश्त उठाने के ठीक 20 दिन बाद मिलेगी।
- बड़े किसान (5 एकड़ से अधिक जमीन): इन्हें यूरिया तीन किश्तों में दी जाएगी। हर किश्त के बीच में 20-20 दिनों का अंतर होना जरूरी है।
3. बोरी गिनने का नया और सीधा नियम (राउंड ऑफ)
खाद बांटते समय पॉइंट या दशमलव को लेकर होने वाले विवाद को खत्म करने के लिए सरकार ने सीधा नियम बनाया है। अब खाद की बोरियों की गिनती राउंड फिगर (पूर्णांक) में होगी:
- अगर आपकी पात्रता 7.2 बोरी बनती है, तो आपको 7 बोरी खाद मिलेगी।
- अगर आपकी पात्रता 7.8 बोरी बनती है, तो आपको 8 बोरी खाद मिलेगी।
सरकार की सख्त चेतावनी
राज्य शासन ने सभी सोसायटियों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खाद बांटने का काम पूरी पारदर्शिता से हो। खाद की कोई कालाबाजारी या औद्योगिक दुरुपयोग न कर पाए, इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस व्यवस्था से इस साल किसानों को सोसायटियों में भटकना नहीं पड़ेगा।




















