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नाना पाटेकर का निधन: जिस कड़क आवाज़ और बेबाक डायलॉग्स से मशहूर हुए थे, उसी खामोशी के साथ दुनिया को अलविदा कह गए

गोवा/मुंबई: भारतीय सिनेमा के महान और बेबाक अभिनेताओं में शुमार नाना पाटेकर (विश्वनाथ पाटेकर) का 75 वर्ष की आयु में गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स और अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें अचेत अवस्था में पाया गया था। डॉक्टरों द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

​उनके अचानक चले जाने से पूरे बॉलीवुड, मराठी सिनेमा और देश भर में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

​’क्रांतिवीर’ की गूंज और बेबाक संवाद अदायगी

​अपनी बुलंद आवाज़, अनोखी डायलॉग डिलीवरी और संजीदा अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का उनका कालजयी संवाद—”आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…” और “साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है…”—आज उनके जाने पर हर प्रशंसक की ज़ुबान पर है।

​’नटसम्राट’ से ‘वेलकम’ तक अमिट छाप

​’तिरंगा’, ‘परिंदा’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार भारतीय सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं। उन्हें उत्कृष्ट अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री से भी नवाजा गया था।

​समाज सेवा में ‘नाम फाउंडेशन’ का योगदान

​फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर अपनी दरियादिली और समाज सेवा के लिए भी जाने जाते थे। अपनी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों की मदद और पुनर्वास के लिए ऐतिहासिक काम किए।

​उनके निधन से भारतीय कला और सामाजिक जगत को एक अपूरणीय क्षति हुई है।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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