छत्तीसगढ़

डबल मर्डर केस: नए कानून के प्रावधानों के तहत आरोपी को आजीवन कारावास और अर्थदंड

जशपुर : प्रार्थी चक्रधर यादव उम्र 50 साल निवासी खजरीढाप चौकी कोतबा ने दिनांक 18.11.2024 को चौकी कोतबा में रिपोर्ट दर्ज कराया कि इसका पुत्र खीरसागर यादव उम्र 28 साल लगभग 06 वर्ष पूर्व कमाने-खाने के लिये केरल गया था, जो 01 वर्ष पहले घर आया और अपने साथ 01 महिला एवं 02 बच्चे लेकर आया। महिला, बच्चों के बारे में पूछने पर महिला को पत्नी रोषनी बाई उम्र 26 साल का बताया तथा 02 लड़के बच्चे उम्र 04 साल एवं 01 साल को स्वयं का पुत्र होना बताया। महिला को अलग जाति का होने से प्रार्थी ने अपने पुत्र खीरसागर यादव के हिस्से का जमीन एवं घर देकर अलग कर दिया था, वे प्रार्थी के घर से कुछ दूरी में रहते थे।

खीरसागर यादव एवं उसकी पत्नी शराब पीकर हमेशा लड़ाई-झगड़ा करते रहते थे।

प्रार्थी चक्रधर यादव दिनांक 18.11.2024 के शाम लगभग 06ः00 बजे अपनी पत्नी के साथ खेत तरफ से काम करके घर में लौटा था, उसी दौरान देखा कि खीरसागर यादव एवं उसकी पत्नी रोशनी बाई दोनों शराब पीकर लड़ाई-झगड़ा कर रहे थे। खीरसागर यादव पहले से बाजार से मछली एवं हड़िया खरीदकर लेकर आया था उसके पिये और लड़ाई-झगड़ा कर थे। सब्जी बनाने के दौरान किसी बात को लेकर दोनों पति-पत्नि में विवाद बढ़ गया, इस कारण खीरसागर यादव अपनी पत्नी को लकड़ी डंडा से मारने लगा, वह डंडा टूट गया, फिर दूसरे डंडे से रोषनी बाई के सिर में जोर से वार करने पर वह जमीन में गिर गई। मारपीट करता देख बीच-बचाव करने आई जगरमनी बाई वहां पर आई थी उसके सिर में भी खीरसागर यादव ने डंडे से कई बार वार दिया। खीरसागर यादव के मारपीट करने से *रोशनी बाई एवं जगरमनी बाई* की मौके पर ही मृत्यू हो गई। प्रार्थी की उक्त रिपोर्ट पर खीरसागर यादव के विरूद्ध चौकी कोतबा में भा.न्या.सं. की धारा 103(1) का अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। प्रकरण का आरोपी खीरसागर यादव घटना घटित कर फरार था।

डबल मर्डर की गंभीर अपराध घटित होने पर जशपुर पुलिस द्वारा उक्त फरार आरोपी को 24 घंटे के भीतर दिनांक 19.11.2024 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था।

उक्त प्रकरण में दिनांक 02.02.2026 को विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति तथा जनजाति अत्याचार निवारण के न्यायालय जशपुर (छ.ग.) द्वारा आदेश पारित किया गया कि अभियोजन साक्ष्य की विवेचना से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर उक्त अभियुक्त को धारा 103(1) (दो बार) के अपराध के लिये आजीवन कारावास एवं रू. 500/-, 500/- रू. के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

प्रकरण के लोक अभियोजक श्री अजीत रजक, एवं प्रकरण की विवेचना SDOP पत्थलगांव डॉ धुर्वेश कुमार जायसवाल के द्वारा की गई थी।

𝐁𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐏𝐚𝐭𝐞𝐥

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐢𝐧 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐛𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐍𝐞𝐰𝐬
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