कोरबा। गेवरा रोड से पेंड्रा रोड के बीच बन रही नई विद्युतीकृत डबल रेलवे लाइन परियोजना में निर्माण सामग्री के गायब होने के मामले में कोरबा पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि करोड़ों की सामग्री की चोरी कोई बाहरी डकैती नहीं, बल्कि कंपनी के भीतर के ही कर्मचारियों द्वारा किया गया एक सुनियोजित गबन था।
क्या था मामला?
परियोजना का कार्य देख रही शिवाकृति इंटरनेशनल लिमिटेड ने थाना कटघोरा में शिकायत दर्ज कराई थी कि सिंघिया और सुतर्रा स्थित उनके स्टोर से भारी मात्रा में लोहे के स्लीपर और अन्य कीमती निर्माण सामग्री गायब है। शुरुआती तौर पर इसे बाहरी गिरोह द्वारा की गई लूट के रूप में पेश करने की कोशिश की गई थी।
पुलिस की सघन जांच और खुलासा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले व नीतिश ठाकुर के मार्गदर्शन में एसडीओपी कटघोरा विजय सिंह राजपूत ने जब गहराई से जांच की, तो संदेह की सुई कंपनी के ही कर्मचारियों पर जा टिकी।
गहन पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला “हथियारबंद डकैती” का नहीं बल्कि आंतरिक गबन (Physical Misappropriation) का है। आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अन्य कर्मचारियों पर दबाव भी बनाया था ताकि वे इसे बाहरी हमला बता सकें।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- तेजबहादुर पटेल: कंपनी में जेसीबी ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था। इसने अपने पद का फायदा उठाकर पिछले कई महीनों से सामग्री चोरी कर कबाड़ियों को बेची।
- राहुल सिंह मरकाम: इस पूरे कृत्य में तेजबहादुर का सहयोगी रहा।
बरामदगी का विवरण:
- घटना में प्रयुक्त एक जेसीबी (JCB) वाहन।
- रेलवे लोहे के स्लीपर के टुकड़े।
- नगद राशि।
- जप्त की गई कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत: ₹25,06,000/- (पच्चीस लाख छह हजार रुपये)।
कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने थाना कटघोरा में बी.एन.एस. (BNS) की विभिन्न धाराओं (316(5), 317(2), 317(3), 3(5)) के तहत अपराध क्रमांक 43/2026 पंजीबद्ध किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य कबाड़ियों और संदिग्धों की तलाश कर रही है।




















