छत्तीसगढ़

मौसम अपडेट : छत्‍तीसगढ़ में लगी सावन की झड़ी, सरगुजा और बिलासपुर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट….

मौसम अपडेट : छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी है। इस बीच मौसम विभाग ने जशपुर, सूरजपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़, सरगुजा, बिलासपुर, सारंगढ़- बिलाईगढ़, सक्ति, रायगढ़, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सरगुजा, मनेंद्रगढ़, कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, जशपुर और गौरेल्ला- पेंड्रा-मरवाही में भारी बारिश हो सकती है।

मानसूनी के प्रभाव से छत्‍तीसगढ़ में बारिश की रफ्तार काफी ज्यादा बढ़ गई है, इससे प्रदेश में बारिश की स्थिति में भी सुधार हो रहा है। इसका अंदाजा भी इससे लगाया जा सकता है कि पांच दिन पहले प्रदेश भर में जो बारिश सामान्य से 28 प्रतिशत कम थी, वह वर्तमान में सामान्य से 12 प्रतिशत कम है।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक जून से लेकर 22 जुलाई तक प्रदेश में 401.6 मिमी बारिश हुई जबकि वास्तविक रूप में 457.4 मिमी बारिश होनी थी। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि एक निम्न दाब का क्षेत्र पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे लगे छत्‍तीसगढ़ के ऊपर स्थित है। इसके साथ ही ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण 7.6 किमी फैला है।

मानसून द्रोणिका मध्य समुद्र तल पर जैसलमेर, अजमेर, गुना, चांदबाली और उसके बाद दक्षिण पूर्व की ओर पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी तक 1.5 किमी ऊंचाई तक है। इसके प्रभाव से मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने तथा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। सरगुजा संभाग व उससे लगे बिलासपुर संभाग के जिलों में भारी बारिश की संभावना है।

बीजापुर में सबसे ज्यादा, तो सरगुजा में सबसे कम बारिश

जानकारी के अनुसार सरगुजा में सबसे कम बारिश 181.3 मिमी, जो सामान्य से 63 प्रतिशत कम है, यहां 494.5 मिमी बारिश होनी थी। इसी प्रकार बीजापुर में सर्वाधिक बारिश 943.2 मिमी हुई है जबकि अब तक यहां 511 मिमी बारिश होनी थी, जो सामान्य से 85 प्रतिशत ज्यादा है।

वहीं दूसरी ओर रायपुर जिले में 319.2 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 20 प्रतिशत कम है, रायपुर में अब तक 400.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।

रायपुर में दिन भर रुक-रुक कर होती रही बारिश

मानसूनी तंत्र के प्रभाव से रायपुर सहित प्रदेश भर में सोमवार को रुक-रुक कर बारिश होती रही। इसके चलते प्रदेश के मौसम में भी ठंडकता आ गई। हालांकि बारिश के चलते मुख्य मार्गों से लेकर गली मुहल्लों के गढ्डों में भी जलभराव रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा।

बिलासपुर मौसम अपडेट बारिश की खोज में बादल, ललकार रहा उमस…

न्यायधानी बिलासपुर में इस वर्ष एक जून से अब तक मानसून की बारिश सामान्य से अधिक हो चुकी है,फिर भी उमस और गर्मी की स्थिति कम नहीं हो पाई है। इस वजह से लोग राहत की सांस नहीं ले पा रहे हैं। बीते चार-पांच दिनों में 15 मिलीमीटर से भी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। किसान भी चिंतित हैं।

भू अभिलेख शाखा के अनुसार, बिलासपुर में अब तक सामान्य से अधिक बारिश हुई है। बावजूद इसके, जिस तरह की मूसलधार बारिश की उम्मीद लोग कर रहे थे, वह अब तक नहीं हो पाई है। लगातार बारिश की कमी के चलते उमस और गर्मी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। जिस वजह से शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

जहां एक ओर लोग ठंडी हवाओं और बारिश की बूंदों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उमस और तापमान में वृद्धि ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों बादल वर्षा की खोज में हो और उमस ललकार रहा हो । बिजली की कटौती और पानी की कमी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। थोड़ी राहत की बात यह है कि आज से सावन मास प्रारंभ हुआ है। आसमान में बादलों का घेरा बढ़ने से सूर्यदेव नजर नहीं आए। ऐसे में तापमान में मामूली गिरावट संभावित है।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी

मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की संभावना है, लेकिन यह केवल अनुमान है। विभाग ने कहा कि अगले कुछ दिनों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जिससे उमस और गर्मी में थोड़ी राहत मिल सकती है। बिलासपुर संभाग के पूर्वी क्षेत्र में संभावना ज्यादा है।

बढ़ती उमस और इसके प्रभाव

चिकित्सकों का मानना है कि उमस बढ़ने से स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। लोग थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं। ऐसे मौसम में हाइड्रेशन का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वे उमस और गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

बिलासपुर की जलवायु पर नजर

मौसम विशेषज्ञ अब्दुल सिराज खान का कहना है कि बिलासपुर की जलवायु में मानसून के दौरान अक्सर ऐसी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं, जब अधिक बारिश के बावजूद उमस और गर्मी बनी रहती है। इसका मुख्य कारण शहर के आसपास के क्षेत्रों में हरियाली की कमी और बढ़ते कंस्ट्रक्शन कार्य हैं। इससे जलवायु परिवर्तन भी तेजी से हो रहा है, जो लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

एक विंड शियर जोन

मानसून द्रोणिका माध्य समुद्र तल पर जैसलमेर, कोटा, गुना, मंडला, निम्न दाब के केंद्र, चांदबाली और उसके बाद पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक स्थित है। एक विंड शियर जोन 20 डिग्री उत्तर में 3.1 किलोमीटर से 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। एक पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडल में 5.8 किलोमीटर ऊंचाई पर, अक्ष 67 डिग्री पूर्व और 28 डिग्री उत्तर में मौजूद है। जिसके प्रभाव से प्रदेश में बादल बरस सकते हैं।

वीवीआईपी क्षेत्र में बूंदाबांदी

मौसम भी इन दिनों गजब का है। सोमवार को कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई वो सिर्फ वीवीआईपी क्षेत्रों में। जैसे हंसा विहार, रेलवे आफिसर्स कालोनी, वसंत विहार, मिनोचा कालोनी शामिल था। वहीं अधिकांश स्थानों में बूंदाबांदी भी नहीं हुई। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में बादल कहां कहां बरसते हैं।

𝐁𝐇𝐈𝐒𝐌 𝐏𝐀𝐓𝐄𝐋

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐇𝐈𝐍𝐃𝐁𝐇𝐀𝐑𝐀𝐓 𝐋𝐈𝐕𝐄 𝐍𝐞𝐰𝐬
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