कोरबा, छत्तीसगढ़ | 22 फरवरी, 2026 छत्तीसगढ़ के ऊर्जा धानी कहे जाने वाले कोरबा जिले से भारत के लिए एक गौरवशाली खबर आई है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा मेगा परियोजना अगले वित्त वर्ष (2026-27) तक दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खदान बनने का गौरव हासिल करने वाली है। कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी ने उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है।
मील का पत्थर: 63 मिलियन टन का लक्ष्य
SECL के सीएमडी (CMD) हरीश दुहान ने आज मीडिया से चर्चा के दौरान साझा किया कि गेवरा खदान की क्षमता को विस्तार देने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।
वैश्विक रैंकिंग: वर्तमान में अमेरिका की ‘ब्लैक थंडर’ माइन दुनिया की सबसे बड़ी खदान मानी जाती है।
नया रिकॉर्ड: गेवरा खदान अगले साल तक 63 मिलियन टन (MT) वार्षिक उत्पादन के आंकड़े को छू लेगी, जिससे यह विश्व में पहले स्थान पर पहुँच जाएगी।
भविष्य की योजना: केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय से इस खदान को सालाना 70 मिलियन टन उत्पादन तक ले जाने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।
आधुनिक तकनीक और पर्यावरण का संतुलन
गेवरा खदान की सफलता का राज इसकी उन्नत कार्यप्रणाली में छिपा है। कंपनी ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं:
ब्लास्ट-फ्री माइनिंग: यहाँ कोयले के खनन के लिए पर्यावरण के अनुकूल ‘सरफेस माइनर’ तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे धूल और शोर का प्रदूषण कम होता है।
फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी: खदान से कोयले की ढुलाई के लिए रेलवे साइडिंग और कन्वेयर बेल्ट का जाल बिछाया गया है, जिससे ट्रकों पर निर्भरता कम हुई है।
सौर ऊर्जा का संगम: SECL अब केवल कोयला कंपनी नहीं रह गई है। गेवरा और आसपास के क्षेत्रों में कंपनी 700 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी लगा रही है।
SECL का IPO और आर्थिक बदलाव
खबर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। SECL के वित्तीय भविष्य को लेकर भी बड़ी घोषणाएं हुई हैं:
IPO की तैयारी: कंपनी मार्च 2027 तक अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की योजना बना रही है, जिससे निवेशकों को छत्तीसगढ़ के इस रत्न में हिस्सेदारी का मौका मिलेगा।
दुर्लभ तत्वों की खोज: खदान से निकलने वाले कचरे (ओवरबर्डन) से ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ निकालने के लिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम शुरू किया गया है, जो सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण में काम आएंगे।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि गेवरा का यह विस्तार न केवल भारत की ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ को मजबूत करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। कोयला उत्पादन बढ़ने से देश के पावर प्लांट्स को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे बिजली संकट का खतरा हमेशा के लिए टल जाएगा।




















