छत्तीसगढ़ से मानसून वापसी 2025
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई में कुछ देरी होने की संभावना है।
1. वापसी की संभावित तिथि
|
पैरामीटर |
सामान्य तिथि |
इस वर्ष संभावित तिथि |
|---|---|---|
|
मानसून वापसी |
5 अक्टूबर |
10 अक्टूबर के बाद |
2. देरी का मुख्य कारण
मानसून की सामान्य तारीख में इस विलंब का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी (BoB) में बनने वाली मौसमी प्रणाली है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र या चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है, जो वापसी की प्रक्रिया को लगभग 5 दिन तक टाल सकता है।
3. वापसी की प्रक्रिया
- शुरुआत: राज्य में मानसून की विदाई की शुरुआत कोरिया जिले से होने का अनुमान है।
- मौसम में बदलाव: 10 अक्टूबर के बाद जब मानसून की वापसी शुरू हो जाएगी, तब पूरे राज्य में मौसम शुष्क होने लगेगा।
ध्यान दें: मौसमी प्रणालियों में लगातार बदलाव होते रहते हैं, इसलिए सामान्य तिथियों में यह परिवर्तन पूरी तरह से अपेक्षित है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम ही अक्सर मानसून की वापसी को प्रभावित करते हैं।
छत्तीसगढ़ मौसम अपडेट: निम्न दाब का प्रभाव और बारिश का पूर्वानुमान (4 अक्टूबर 2025)
बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए निम्न दाब का क्षेत्र (Low-Pressure Area) छत्तीसगढ़ के मौसम पर गहरा असर डाल रहा है, जिसके चलते राज्य में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। यह मौसमी प्रणाली मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ को प्रभावित कर रही है, जिससे शुष्क मौसम की शुरुआत में विलंब हो रहा है।
1. मौसमी सिस्टम की वर्तमान स्थिति
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एक अवदाब (Depression) वर्तमान में अंदरुनी ओडिशा के ऊपर स्थित है। यह अवदाब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सिस्टम का संभावित मार्ग:
- शुरुआत में यह उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए अंदरुनी ओडिशा को पार करेगा।
- इसके बाद यह उत्तर छत्तीसगढ़ के ऊपर पहुंचेगा।
- उत्तरी छत्तीसगढ़ पर पहुंचने के बाद, इसके लगातार कमजोर होकर अगले 24 घंटों में एक चिह्नित निम्न दाब के क्षेत्र (Marked Low-Pressure Area) के रूप में परिवर्तित होने की संभावना है।
संबद्ध द्रोणिका:
ओडिशा के ऊपर स्थित इस अवदाब के केंद्र से एक द्रोणिका (Trough) छत्तीसगढ़ से होते हुए उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश तक 1.5 किलोमीटर से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तारित है। यह द्रोणिका ही राज्य में नमी और अस्थिरता को बनाए रखकर बारिश में योगदान दे रही है।
2. 4 अक्टूबर (शनिवार) का मौसम पूर्वानुमान
आज, 4 अक्टूबर को प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी, खासकर उत्तरी छत्तीसगढ़ में।
|
पूर्वानुमान |
विवरण |
|---|---|
|
बारिश की प्रकृति |
अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। |
|
भारी बारिश/वज्रपात |
एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात होने और भारी बारिश होने की संभावना है। |
|
प्रभावित क्षेत्र |
भारी बारिश का क्षेत्र मुख्यतः उत्तरी छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग) रहने की संभावना है। |
|
अन्य प्रभाव |
मध्य छत्तीसगढ़ में भी मौसम बदला हुआ रहेगा। |
3. आगामी दिनों का दृष्टिकोण (5 अक्टूबर से)
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान बारिश की गतिविधियां 5 अक्टूबर (रविवार) से कम होने लगेंगी।
- 5 अक्टूबर (रविवार): बारिश की गतिविधियों में कमी आनी शुरू हो जाएगी।
- इसके बाद: बारिश की गतिविधि में लगातार कमी होने की संभावना है, जो दर्शाता है कि मानसून की विदाई की स्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल होने लगेंगी।
4. बिलासपुर का हाल (शुक्रवार, 3 अक्टूबर)
निम्न दाब के प्रभाव से बिलासपुर में शुक्रवार को दिनभर मौसम बदला हुआ रहा:
- वर्षा की स्थिति: सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही, जिससे झड़ी जैसी स्थिति बनी रही।
- जनजीवन पर असर: हल्की बारिश और झड़ी के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
- धार्मिक आयोजन पर असर: नवरात्र के बाद दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और झांकी पर भी बारिश का असर पड़ा, हालांकि भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और अरपा नदी के तट पर देर रात तक भीड़ जुटी रही।
5. तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसमी बदलाव के कारण बिलासपुर के तापमान में महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किए गए हैं:
|
तापमान |
दर्ज मान (शुक्रवार) |
सामान्य स्थिति से अंतर |
विवरण |
|---|---|---|---|
|
अधिकतम तापमान (दिन) |
लगभग 27 डिग्री सेल्सियस |
सामान्य से तीन से चार डिग्री कम |
दिन के तापमान में व्यापक गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम ठंडा बना रहा। |
|
न्यूनतम तापमान (रात) |
24 डिग्री सेल्सियस |
सामान्य से 0.9 डिग्री कम |
रात का तापमान सामान्य के करीब रहा, जिसके कारण दिन की अपेक्षा रात में हल्की उमस महसूस हुई। |
निष्कर्ष:
बंगाल की खाड़ी में बना यह मौसमी सिस्टम मानसून की वापसी को कुछ दिनों के लिए टाल रहा है, जिससे किसानों को थोड़ी और नमी मिल सकती है। हालांकि, रविवार से बारिश में कमी आने की संभावना है, जो धीरे-धीरे राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की अंतिम विदाई का मार्ग प्रशस्त करेगी। निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे आज (शनिवार) उत्तरी क्षेत्रों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहें।
आगे क्या?
क्या आप जानना चाहेंगे कि इस बारिश का छत्तीसगढ़ की धान की फसलों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?




















