- आज संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सरकार का पक्ष रखा। विपक्ष द्वारा किसानों के हितों की अनदेखी के आरोपों का जवाब देते हुए गोयल ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
मुख्य बातें: जो पीयूष गोयल ने संसद में कहीं
- कृषि और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित: गोयल ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत ने वार्ता के दौरान अपनी “रेड लाइन्स” (सीमाएं) स्पष्ट कर दी थीं। उन्होंने कहा, “हमने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया है। भारतीय किसानों को अमेरिकी उत्पादों से किसी भी प्रकार के अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ेगा।”
- टैरिफ में भारी कटौती: मंत्री ने बताया कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। यह भारतीय निर्यातकों, विशेषकर कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- विपक्ष के आरोपों का खंडन: विपक्षी दलों द्वारा इस डील को ‘किसानों के साथ विश्वासघात’ बताने पर गोयल ने कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में कहीं बेहतर शर्तें हासिल की हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान: ट्रेड डील के साथ-साथ गोयल ने भारत की ऊर्जा जरूरतों का भी जिक्र किया और कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
किसानों के लिए क्या बदलेगा?
सरकार का दावा है कि इस व्यापार समझौते से भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जबकि घरेलू बाजार में विदेशी कृषि उत्पादों की अनियंत्रित एंट्री को रोका गया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि और नए वैश्विक बाजारों तक उनकी पहुंच आसान होगी।




















