बिलासपुर, छत्तीसगढ़: बिलासपुर पुलिस ने विजयदशमी पर्व के शुभ अवसर पर एक बार फिर जनहित में बड़ा कदम उठाते हुए ‘चेतना अभियान’ के तहत आमजनों के गुम हुए कीमती मोबाइल वापस किए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश पर चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत, साइबर सेल (ACCU) और बिलासपुर जिले के सभी थानों ने मिलकर लगभग ₹16 लाख रुपये की अनुमानित कीमत के 100 नग गुम मोबाइल बरामद किए और उन्हें उनके असली मालिकों को सौंपा।
इस कार्रवाई ने उन लोगों के चेहरे पर मुस्कान वापस ला दी, जिन्होंने अपने कीमती मोबाइल फोन वापस पाने की उम्मीद छोड़ दी थी।
’चेतना अभियान’ की सफलता और बरामदगी का दायरा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह ने गुम हुए मोबाइल की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, उन्हें तलाश कर संबंधित धारकों को वापस करने के लिए एक विशेष ‘चेतना अभियान’ चलाने के निर्देश दिए थे। यह अभियान न केवल लोगों की संपत्ति वापस दिलाने पर केंद्रित है, बल्कि इसके माध्यम से बिलासपुर पुलिस आम जनता और पुलिस के बीच विश्वास को और मजबूत कर रही है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण व एसीसीयू) श्री अनुज कुमार के मार्गदर्शन में, एसीसीयू (एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट) बिलासपुर के अधिकारी-कर्मचारियों ने तकनीक और अथक प्रयास का तालमेल बैठाया। इस सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोबाइल फोन केवल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, झारखण्ड, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों से भी बरामद किए गए।
मुख्य सफलता के बिंदु:
- बरामद मोबाइल: 100 नग
- कुल अनुमानित कीमत: लगभग ₹16 लाख रुपये
- वितरण की तिथि: 02 अक्टूबर 2025 (विजयदशमी के उपलक्ष्य में)
- विशेषता: बरामदगी का दायरा अंतर्राज्यीय रहा।
पुलिस द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है। विगत माह भी बिलासपुर पुलिस ने अपने प्रयासों से 200 से अधिक गुम हुए मोबाइल सफलतापूर्वक रिकवर कर उनके मालिकों को सौंपे थे, जो यह दर्शाता है कि यह अभियान एक निरंतर और प्रभावी प्रक्रिया है।
मोबाइल वापसी: जब उम्मीदें सच हुईं
दिनांक 02 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के हाथों जब मोबाइल धारकों को उनके फोन वापस किए गए, तो कार्यक्रम स्थल पर खुशी का माहौल छा गया।
गुम हुए मोबाइल अक्सर डेटा, यादों और महत्वपूर्ण संपर्कों का खजाना होते हैं। कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं, बल्कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा होता है। अपना फोन वापस पाकर लोगों ने बिलासपुर पुलिस के ‘चेतना अभियान’ की खुलकर सराहना की और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) सहित पूरी पुलिस टीम को धन्यवाद दिया। यह अभियान पुलिस और नागरिकों के बीच एक सकारात्मक और मजबूत रिश्ता बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
साइबर सुरक्षा और जागरूकता: ठगी से बचाव के उपाय
मोबाइल वितरण के मुख्य कार्यक्रम के दौरान, पुलिस ने ‘चेतना अभियान’ के दूसरे महत्वपूर्ण पहलू पर भी ध्यान केंद्रित किया: साइबर जागरूकता।
एसीसीयू बिलासपुर में पदस्थ उप निरीक्षक प्रभाकर तिवारी ने वर्तमान में चल रहे विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों और ठगी के नवीनतम तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। आज के डिजिटल युग में जहाँ मोबाइल मिलना खुशी की बात है, वहीं साइबर ठगी से सुरक्षित रहना सबसे बड़ी चुनौती है।
कार्यक्रम में बताई गई मुख्य साइबर ठगी और उनसे बचाव के उपाय:
1. डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest)
ठगी का तरीका: अपराधी खुद को CBI, NCB, या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल करके या मैसेज भेजकर व्यक्ति को बताते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध काम हुआ है या उनके खिलाफ वारंट जारी है। इसके बाद वे ‘मामले को रफा-दफा’ करने के नाम पर पैसे की मांग करते हैं।
बचाव: याद रखें, पुलिस या कोई भी सरकारी संस्था आपको अचानक वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करने की धमकी नहीं देती। यदि ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।
2. सेक्सटॉर्शन (Sextortion – वीडियो कॉलिंग के माध्यम से)
ठगी का तरीका: अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल या मैसेज आता है। कॉल करने वाला अश्लील बातें करके या स्क्रीन रिकॉर्डिंग का डर दिखाकर पीड़ितों को ब्लैकमेल करता है और पैसे मांगता है।
बचाव: अज्ञात वीडियो कॉल को कभी भी स्वीकार न करें। सोशल मीडिया पर किसी भी अजनबी की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और अपनी निजी तस्वीरें/वीडियो किसी भी अजनबी से साझा न करें।
3. वॉट्सएप्प की डी.पी. बदलकर ठगी
ठगी का तरीका: अपराधी किसी उच्च पदस्थ अधिकारी या परिचित व्यक्ति की प्रोफाइल पिक्चर (डी.पी.) को कॉपी करके उसी नंबर से मिलता-जुलता नया वॉट्सएप्प अकाउंट बनाते हैं। फिर वे उनके दोस्तों या सहकर्मियों को मैसेज भेजकर आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे मांगते हैं।
बचाव: पैसे ट्रांसफर करने से पहले हमेशा उस व्यक्ति को सीधे कॉल करके उसकी पहचान और पैसे की मांग की पुष्टि करें। केवल डी.पी. देखकर भरोसा न करें।
4. ऑनलाइन लोन एप्प (Online Loan Apps)
ठगी का तरीका: ये एप्प बहुत कम दस्तावेज़ों पर तुरंत लोन देने का वादा करते हैं। लोन लेने के बाद ये अत्यधिक ब्याज और जुर्माने की मांग करते हैं। पैसे न चुकाने पर ये फ़ोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट और गैलरी डेटा का दुरुपयोग करने की धमकी देते हैं।
बचाव: हमेशा RBI द्वारा मान्यता प्राप्त और वैध NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) से ही लोन लें। किसी भी एप्प को अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट, कैमरा या गैलरी तक पहुँचने की अनुमति न दें।
5. अन्य ठगी के प्रारूप:
- कस्टमर केयर के नाम पर: ऑनलाइन सर्च इंजन से मिले फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करने पर वे समस्या हल करने के नाम पर ‘एनीडेस्क’ जैसे रिमोट एक्सेस एप्प डाउनलोड करवाकर बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
- बिटकॉइन/दुरिजम प्लान के नाम पर: कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देकर फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीमों में पैसा लगवाते हैं।
सुरक्षा का मूल मंत्र: किसी भी तरह की निजी या वित्तीय जानकारी, जैसे OTP, पिन, या पासवर्ड किसी से भी साझा न करें। अगर आप ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
अभियान में शामिल रही टीम
इस गुम हुए मोबाइल चेतना अभियान की सफलता में ए.सी.सी.यू. बिलासपुर की पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में शामिल अधिकारी-कर्मचारियों ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और लगन से इस कार्य को सफल बनाया।
महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारी-कर्मचारी:
- निरीक्षक अजहरउद्दीन (ए.सी.सी.यू. बिलासपुर प्रभारी)
- प्र.आर. आतिश पारिक
- प्र.आर. राहुल सिंह
- आरक्षक राघवेन्द्र साहू
- आरक्षक प्रशांत राठौर
- आरक्षक प्रशांत सिंह
- आरक्षक विकास राम
- आरक्षक मुकेश वर्मा
- आरक्षक सतीश भारद्वाज
- आरक्षक नवीन एक्का
बिलासपुर पुलिस का यह प्रयास न सिर्फ कानूनी व्यवस्था बनाए रखने, बल्कि ‘सेवा, सुरक्षा और सहयोग’ के अपने नारे को चरितार्थ करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पहल नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।




















