यरूशलेम | 25 फरवरी, 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इसराइल की संसद (Knesset) के ऐतिहासिक मंच से एक ऐसा संबोधन दिया, जिसने न केवल भारत और इसराइल के रिश्तों को नई ऊंचाई दी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नया घोषणापत्र भी लिख दिया। पीएम मोदी ने मुंबई के 26/11 और इसराइल के 7/10 (7 अक्टूबर) के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत और इसराइल अब पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे।
साझा दर्द, साझा संकल्प
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत उन निर्दोष लोगों को याद करते हुए की जिन्होंने इन कायराना हमलों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा:
“आतंकवाद केवल सरहदों की लड़ाई नहीं है, यह मानवता की आत्मा पर प्रहार है। भारत ने 26/11 का वो काला दिन देखा है और इसराइल ने 7/10 की वो बर्बरता झेली है। मैं आज इस पवित्र सदन से कहना चाहता हूं—न हम 26/11 भूले हैं, न हम 7/10 भूलेंगे।”
आर्टिकल की मुख्य विशेषताएं:
- ऐतिहासिक संबोधन: पीएम मोदी ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उनके भाषण के दौरान कई बार सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।
- संघर्ष से प्रगति तक: पीएम ने स्वीकार किया कि दोनों देशों का इतिहास संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा है, लेकिन अब समय ‘शांति और प्रगति’ के नए युग का है।
- रणनीतिक साझेदारी: इस दौरे के दौरान भारत और इसराइल ने रक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में 5 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
इसराइल-भारत: संकट के साथी
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत और इसराइल की दोस्ती केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘भरोसे’ की नींव पर टिकी है। उन्होंने कहा कि “जब दुनिया संकट में होती है, तो भारत और इसराइल समाधान बनकर उभरते हैं।”
एक नए युग की शुरुआत
प्रधानमंत्री का यह बयान दर्शाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात मुखरता से रखने के लिए तैयार है। संघर्ष की यादों को संजोते हुए शांति की ओर बढ़ने का यह विजन आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा।
“हमारा इतिहास भले ही संघर्षों की आग में तपा हो, लेकिन हमारा भविष्य तकनीक, विकास और अटूट शांति की रौशनी से जगमगाएगा।” — नरेंद्र मोदी




















