छत्तीसगढ़राजनीति

दावों और जमीनी हकीकत में गंभीर अंतर, किसानों और युवाओं के हाथ लगी निराशा – अरविंद शुक्ला

बिलासपुर: राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए वर्ष 2026-27 के बजट पर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरविंद शुक्ला ने बजट का गहन विश्लेषण करने के बाद इसे ‘निराशाजनक’ और ‘पुरानी योजनाओं की री-पैकेजिंग’ करार दिया है। शुक्ला का कहना है कि सरकार के दावों और राज्य की वास्तविक जमीनी स्थिति के बीच एक गंभीर खाई नजर आ रही है।

​किसानों के साथ ‘छलावा’ और लाभांश में कमी

​अरविंद शुक्ला ने कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि बजट किसानों की मूलभूत समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

    • समर्थन मूल्य का मुद्दा: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने धान पर 3286 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अंतर की राशि देने का कोई स्पष्ट बजटीय प्रावधान नहीं किया है। इससे किसानों को सीधे तौर पर प्रति एकड़ लगभग 4000 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा कृषि लागत (डीजल, खाद,बीज , कीटनाशक ) मजदूरी में लगातार वृद्धि हुई है ,अगर वास्तविक लागत की तुलना समर्थन मूल्य से की जाए तो किसानों का लाभांश घटता दिखाई देता है , बजट में लागत नियंत्रण के ठोस उपायों का अभाव है
    • सिंचाई की अधूरी घोषणाएं: सिंचाई विस्तार के नाम पर वर्षों से केवल घोषणाएं हो रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

​”पिछले बजट की घोषणाएं आज तक अधूरी हैं। सरकार ने केवल पुरानी योजनाओं को नए पैकेट में लपेटकर पेश कर दिया है, जिसमें किसी भी नई संरचनात्मक पहल का पूर्णतः अभाव है।” – अरविंद शुक्ला

​युवाओं और महिलाओं की अनदेखी

​कांग्रेस नेता ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं, बेरोजगारों और महिलाओं के लिए इस बजट में कुछ भी ठोस नहीं है। रोजगार सृजन के लिए किसी बड़े रोडमैप की कमी और महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति करने का आरोप उन्होंने लगाया।

​कर्मचारियों की मांगों पर ‘बजटीय चुप्पी’

​राज्य के आंदोलनरत कर्मचारियों और अनियमित कर्मियों के मुद्दे पर अरविंद शुक्ला ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट में निम्नलिखित वर्गों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है:

      • ​अंशकालिक और अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण।
      • ​बीएड (B.Ed), डीएड (D.Ed) प्रशिक्षित अभ्यर्थी।
      • ​रसोइया संघ और स्वास्थ्य कर्मचारी।
      • ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं विकलांग संघ।

​इन वर्गों के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान न होने से यह स्पष्ट है कि सरकार इनकी जायज मांगों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

​अरविंद शुक्ला ने अंत में कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी है। जब तक कृषि लागत पर नियंत्रण और वास्तविक निवेश में वृद्धि नहीं की जाती, तब तक प्रदेश का विकास केवल कागजों तक सीमित रहेगा।

𝐁𝐇𝐈𝐒𝐌 𝐏𝐀𝐓𝐄𝐋

𝐄𝐝𝐢𝐭𝐨𝐫 𝐇𝐈𝐍𝐃𝐁𝐇𝐀𝐑𝐀𝐓 𝐋𝐈𝐕𝐄 𝐍𝐞𝐰𝐬
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