छत्तीसगढ़, जिसे देश का ‘इंडस्ट्रियल हब’ माना जाता है, वहां के कारखानों से एक डराने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने औद्योगिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य के विभिन्न उद्योगों में हुई दुर्घटनाओं में 300 से अधिक श्रमिकों की मौत हो गई है।
विधानसभा में पेश हुए चौंकाने वाले आंकड़े
सदन में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में श्रम विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023 से 2026 के बीच औद्योगिक दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। सबसे ज्यादा मौतें स्टील प्लांट, सीमेंट कारखानों और पावर सेक्टर में दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि:
- औसतन हर महीने राज्य में 8 से 10 श्रमिक औद्योगिक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
- मृतकों में 60% से अधिक श्रमिक ठेका मजदूर (Contractual Labours) श्रेणी के हैं।
- रायपुर, दुर्ग (भिलाई), रायगढ़ और कोरबा जिले ‘डेथ जोन’ के रूप में उभरे हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी बन रही वजह?
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि अधिकांश निजी कंपनियों में सुरक्षा मानकों (Safety Norms) की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुरक्षा ऑडिट केवल कागजों तक सीमित है।
”कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में श्रमिकों की जान जोखिम में डाल रही हैं। कई संयंत्रों में पुराने हो चुके बॉयलरों और मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे धमाके और गैस रिसाव जैसी घटनाएं आम हो गई हैं।”— राजेश सिंह, श्रमिक नेता
विपक्ष का कड़ा रुख और जांच की मांग
विधानसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कड़े सवाल किए। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि श्रम विभाग के अधिकारियों और उद्योग प्रबंधनों के बीच कथित “गठजोड़” के कारण दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती। विपक्ष ने मांग की है कि:
- दोषी कंपनियों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।
- मृतक श्रमिकों के परिजनों को मिलने वाली मुआवजा राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख किया जाए।
- हर छह महीने में थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य हो।
सरकार का पक्ष: “कार्रवाई जारी है”
श्रम मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि जिन उद्योगों में लापरवाही पाई गई है, उनके खिलाफ कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ इकाइयों को ‘क्लोजर नोटिस’ भी थमाया गया है। विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेंसर-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम पर विचार कर रहा है ताकि हादसों को समय रहते रोका जा सके।




















